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पूजन के पूर्व (Poojan Ke Purv)

मुनि श्री 108 समता सागर जी

पूजन के पूर्व 

जीवन क्या है (What is Life)

डॉ. अनिल जैन, जयपुर

जैन दर्शन और विज्ञान के सन्दर्भ में

सप्तऋषि विधान (लघु)

प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी

सप्तऋषि विधान (लघु)

सप्तऋषि विधान

प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी

सप्तऋषि विधान

जैन साहित्य और इतिहास (JAIN SAHITYA AUR ITIHAS)

Pandit Nathuram Premi

संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश भाषाओँ के विविध जैन ग्रन्थों और उनके रचयिताओं का परिचय और इतिहास 
Introduction and History of Various Jain Texts Composed in Sanskrit, Prakrit and Apabhramsha

सर्वार्थ सिद्धि (Sarvarth Siddhi)

आचार्य पूज्यपाद, सम्पादन-अनुवाद. सिद्धान्ताचार्य पं. फूलचन्द्र शास्त्री

सर्वार्थसिद्धि एक प्रख्यात जैन ग्रन्थ हैं। यह आचार्य पूज्यपाद द्वारा प्राचीन जैन ग्रन्थ तत्त्वार्थसूत्र पर लिखी गयी टीका हैं।  इसमें तत्त्वार्थसूत्र के प्रत्येक श्लोक को क्रम-क्रम से समझाया गया है।

सर्वप्रथम ग्रन्थ में तत्त्वार्थसूत्र के मंगलाचरण का अर्थ समझाया गया है। सर्वार्थसिद्धि के दस अध्याय हैं :[4]

1.            दर्शन और ज्ञान

2.            जीव के भेद

3.            उर्ध लोक और मध्य लोक

4.            देव

5.            अजीव के भेद

6.            आस्रव

7.            पाँच व्रत

8.            कर्म बन्ध

9.            निर्जरा

10.          मोक्ष

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जैन मंदिरों तथा तीर्थ क्षेत्रों की जानकारी वैज्ञानिक आधार से एकत्रित करने के बाद सभी जैन आगम को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का सराहनीय कार्य.

सुनील जैन

अतिरिक्त महानिदेशक (सेवा निवृत्त), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय

जैन धर्म ग्रंथो तथा पुस्तकों को सुरक्षित रखने व जन-जन तक पहुंचाने के इस भागीरथी कार्य की बहुत बहुत अनुमोदना.

प्रोफेसर वीरसागर जैन

जैनदर्शन विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय