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श्रेणिक चरित्र Shrenik Charitra

Aacharya Shubchandra

श्रेणिक चरित्र 

समयसार का दार्शनिक चिंतन Samaysaar Ka Darshnik Chintan

Dr. Bhagchand Jain Bhaskar, Nagpur

समयसार का दार्शनिक चिंतन Samaysaar Ka Darshnik Chintan

आचार्य कुन्दकुन्द देव Aacharya Kund Kund Dev

Shri M. B. Patil, Shedwal

आचार्य कुन्दकुन्ददेव के जीवन-वृत्तान्त का यह एक शोधपूर्ण दस्तावेज है।

संयताष्टक Sanyatashtak

बा.ब्र.रविन्द्र जी 'आत्मन'

संयताष्टक (बा.ब्र.रविन्द्र जी 'आत्मन' द्वारा रचित)

लघु समयसार विधान Laghu Samaysar Vidhan

राजमल पवैया Rajmal Pavaiya

समयसार, आचार्य कुन्दकुन्द द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रन्थ है। इसके दस अध्यायों में जीव की प्रकृति, कर्म बन्धन, तथा मोक्ष की चर्चा की गयी है।

यह ग्रंथ दो-दो पंक्तियों से बनी ४१५ गाथाओं का संग्रह है। ये गाथाएँ प्राकृत भाषा में लिखी गई है। इस समयसार के कुल नौ अध्याय है जो क्रमश: इस प्रकार हैं[1]-

जीवाजीव अधिकार

कर्तृ-कर्म अधिकार

पुण्यपाप अधिकार

आस्रव अधिकार

संवर अधिकार

निर्जरा अधिकार

बंध अधिकार

मोक्ष अधिकार

सर्वविशुद्ध ज्ञान अधिकार

अंतर शोधन (Antar Shodhan)

Shri Kanji Swami Ke Pravachan

अंतर शोधन  (Antar Shodhan)

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जैन मंदिरों तथा तीर्थ क्षेत्रों की जानकारी वैज्ञानिक आधार से एकत्रित करने के बाद सभी जैन आगम को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का सराहनीय कार्य.

सुनील जैन

अतिरिक्त महानिदेशक (सेवा निवृत्त), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय

जैन धर्म ग्रंथो तथा पुस्तकों को सुरक्षित रखने व जन-जन तक पहुंचाने के इस भागीरथी कार्य की बहुत बहुत अनुमोदना.

प्रोफेसर वीरसागर जैन

जैनदर्शन विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय